रविवार, 26 जुलाई 2009

जोगिन्दरनगर रेलमार्ग के लिए शुभ संकेत

हिमाचल प्रादेश में कांगडा वैली पठानकोट-जोगिंद्रनगर (केवीआर) रेलवे को यूनेस्को की ओर से वर्ष 2011 में घोषित होने वाली विश्व धरोहर की अस्थायी सूची के लिए नामांकित किया गया है। अंतिम निर्णय स्पेन में होने वाली बैठक में लिया जाएगा। इसका निर्माण 2 मई 1926 को शुरू हुआ। पहली रेलगाड़ी 1 अप्रैल 1929 को पठानकोट रवाना हुई। 163 मील लंबी रेल लाइन 993 पुलों, दो सुरंगों और 484 मोड़ों से होकर गुजरती है। ब्रिटिशकाल में बस्सी परियोजना तक सामान पहुंचाने के लिए यह रेल लाइन बिछाई गई थी। पर 2 करोड़ 72 लाख 1300 रुपए खर्च किए गए थे।

साभार: आधारशिला ब्लॉग
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बुधवार, 22 जुलाई 2009

कार खाई में लुढ़कने से तीन घायल

जोगेंद्रनगर-मंडीसड़क पर ब्रिज मंडी के पास एक मारूति कार के खाई में लुढ़कने से तीन लोग जख्मी हो गए। घायलों में मंडी निवासी हरि चंद, उनकी पत्नी अनीता व बेटी सोनिया शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक अनीता को यहां सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है जबकि बाप-बेटी को प्राथमिक उपचार के उपरांत छुट्टी दे दी गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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ये है जोगिन्दर नगर बस स्टैंड का छायाचित्र



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रविवार, 24 मई 2009

जोगिन्दर नगर को बनाएँ पर्यटन स्थल

जोगिन्दर नगर का तीन दिन का टूर.... मेरी योजना ज़बरदस्त है बस कोई लागू करने वाला होना चाहिए। मुझे लगता है अगले चुनावों तक इंतज़ार करना होगा। चुनाव लड़ने की दिली तमन्ना है मेरी, निजी हित के लिए नहीं लेकिन आत्मसंतोष के लिए। ये रही योजना: 1st day टूरिस्ट्स जोगिन्दर नगर पहुंचते हैं, जोगिन्दर नगर से उन्हे सुबह ही झटिंगरी ले जाया जाएगा। उसके बाद सीधे पहुंचेंगे बरोट.... बरोट में रात को हिमाचली सांस्कृतिक कार्यक्रम औऱ भोजन पेश किया जाएगा। रात वहीं पर काटेंगे... उसी दिन उन्हें उहल नदी भी दिखाएंगे और प्रोजेक्ट भी। 2nd day दूसरे दिन उन्हें बरोट से जोगिन्दर नगर लाया जाएगा लेकिन बस से नहीं, पैदल. सीधे 18 नम्बर तक पहाडियों के बीच दुर्गम रास्ते से होते हुए। एक अलग अनुभव रहेगा..... फिर 18 नम्बर से ट्रॉली से उन्हें नीचे शानन उतारा जाएगा.... शानन रेस्ट हाउस में दोपहर तक रिफ्रेश होंगे और उसके बाद पावर हाउस घुमाया जाएगा। वहीं से बसे से उन्हें छपरोट ले जाएंगे जहां पर झील के किनारे लंच करने की व्यवस्था होगी। उसके बाद वहीं से ट्रॉली पर बिठाकर ( छपरोट से बस्सी तक ट्रॉली सुविधा है जो खराब पड़ी है। उसे ठीक करना होगा) बस्सी ले जाएंगे। बस्सी से मच्छयाल और उसके नज़दीक चुल्ला प्रोजेक्ट के लिए बनी झील (अभी बनेगी) के पास ले जाएंगे। वहां वो घूमें फिरें और रात को वापस जोगिन्दर नगर आ जाएं। रात को जोगिन्दर नगर में डिनर करो और मस्त सो जाओ, 3rd day अब अगली सुबह उन्हें ढेलू ले जाओ। वहां पैराग्लाइडिंग कराओ.... एक्सपर्ट्स के साथ बिठाओ.... एक रोचक अनुभव रहेगा उनके लिए। दोपहर बाद 12 बजे की ट्रेन का टिकट कटवाओ बीड़ रोड का। बीड़ ले जाओ और वहां पर बौद्ध मठ दिखाओ। वहां की मार्किट में वो शॉपिंग करेंगे.. और शाम होते ही वापस जोगिन्दर नगर आ जाएंगे..... हो गई तीन दिन की यात्रा..... बाद में समय के साथ नई जगहों को भी जोड़ा जाएगा......
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आग बुझाने गई महिलाएं झुलसी, दो की मौत

दो महिलाओं को तेज हवा के बीच आग बुझाना इस कदर महंगा पड़ा कि उनका दम ही निकल गया। घटना जोगेंद्रनगर उपमंडल के दूरस्थ क्षेत्र भयाड़ा गूल के मैहड़ू जंगल की है जहां आग बुझाने गई छह महिलाएं आग की चपेट में आ गई, जिससे दो की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके के लिए रवाना हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार को जोगेंद्रनगर के दूरदराज क्षेत्र मैहड़ू जंगल में आग लग गई, जो गांव के नजदीक पहुंचने लगी। इससे चिंतित लोग वन विभाग के कुछ लोगों के साथ वीरवार सुबह आग बुझाने के लिए गए। आग बुझाने का काम चल ही रहा था कि तेज हवा चलने लगी। इस दौरान सुमित्रा देवी पत्नी खेम सिंह और इंदिरा देवी पत्नी देवेंद्र कुमार निवासी मैहड़ू आग की चपेट में आ गई। इससे उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना के मुताबिक चार महिलाएं गंभीर रूप से झुलस भी गई।

यह क्षेत्र दूरदराज होने की वजह से अभी तक चार अन्य महिलाओं की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी हासिल नहीं हो सकी है। प्रशासन को घटना की सूचना वहां के एक खंड विकास समिति सदस्य ने दी। सूचना मिलते ही एसडीएम जोगेंद्रनगर, पुलिस बल और वन अधिकारियों की टीम मैहड़ू के लिए रवाना हो गई है। इस बीच वनमंडलाधिकारी से संपर्क करने की सारी कोशिशें व्यर्थ रहीं।

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हिमाचल की वादियों में खो गए 115 विदेशी

पर्यटकों के लिए मौत की वादी बनकर रह गई हैं। राज्य में 1998 से लेकर 2008 तक 115 विदेशी मौत के आगोश में समा चुके हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत जुटाई जानकारी से हुआ है।
दस्तावेजों के अनुसार अधिकतर विदेशी घूमने-फिरने के लिए इन घाटियों में पहुंचते हैं लेकिन अति उत्साह और नशे के कारण मौत की की आगोश में समा जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में मरे 115 विदेशी पर्यटकों के बारे में प्रशासनिक अमला बताता है कि प्रदेश में सबसे अधिक इजरायली नागरिकों की मौत हुई है। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में दम तोड़ने वालों में 15 विदेशी महिला पर्यटक भी शामिल हैं। अधिकतर विदेशियों की मौत ढांक से गिरकर हुई है तथा कुछ की मौत बीमारी और दम घुटने के कारण बताई गई है। मलाणा क्रीम का स्वाद लेने के शौकीन विदेशी भी मौत के मुंह में समाए हैं। यही नहीं कुछ विदेशी ब्यास नदी में भी डूबे हैं। पार्वती वैली, मलाणा घाटी और मणिकर्ण के कठिन ट्रैकिंग रूट्स पर भी कई विदेशी अपनी जान गवां चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में 115 मरने वाले विदेशियों में 75 प्रतिशत विदेशियों ने कुल्लू की घाटी में ही दम तोड़ा है। उसके बाद कांगड़ा के मैक्लोडगंज में पिछले दस वर्षो के दौरान 20 विदेशियों की मौत हुई है। हैरानी की बात यह है कि छह विदेशियों की देवभूमि में हत्या की गई है। एक विदेशी महिला ने फंदा लगा कर मौत को गले लगाया तो दूसरी विदेशी महिला ने मिंट्टी का तेल छिड़क कर खुद को आग लगा ली, जिससे उसकी मौत हो गई। एक महिला की मौत एयरक्रैश के कारण हुई है।

साभार: दैनिक जागरण
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बुधवार, 29 अप्रैल 2009

जोगेंद्रनगर में काटे 40 वाहनों के चालान

Apr 25, 10:10 pm

जोगेंद्रनगर : जीरों टॉलरेंस डे के मौके पर जोगेंद्रनगर पुलिस ने यातायात नियमों का खुला उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसने की नीयत से चालान किए। हर कहीं पार्किंग करने या जरूरी कागजात न रखने के आरोप में पुलिस ने 40 वाहनों के चालान काटे गए। थाना प्रभारी दोरजे राम ने कहा कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने की गर्ज से यह अभियान चलाया गया है।
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